Jalandhar, February 28, 2023
पंजाब सरकार सार्वजनिक शिक्षा के खिलाफ केंद्र सरकार की 'नई शिक्षा नीति 2020' को लागू करने और शिक्षा के निजीकरण और व्यावसायीकरण के अपने छिपे हुए एजेंडे को लागू करने के लिए 'स्कूल ऑफ एमिनेंस' नामक एक योजना लेकर आई है। कक्षा छह से आठ तक समाप्त हो जाएगी। बारहवीं तक के सरकारी स्कूल चल रहे हैं। आप सरकार 'स्कूल ऑफ एमिनेंस' का आकर्षक नारा देकर छठी से आठवीं कक्षा तक के छात्रों के प्रवेश के दरवाजे बंद करने जा रही है।
उक्त तथ्यों को स्पष्ट करते हुए डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय पाल शर्मा व प्रदेश महासचिव बलबीर लोंगोवाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि स्कूल ऑफ एमिनेंस के खुलने से आसपास के कई सरकारी स्कूलों के बंद होने का डर है। जिस गांव में 'स्कूल ऑफ एमिनेंस' खोला जाएगा, उस गांव के छठी से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले छात्रों को दूसरे गांवों में जाना पड़ेगा, जिससे उनकी मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी। दूसरे शब्दों में कहें तो सरकार उस गांव के प्राथमिक विद्यालय में छठी कक्षा के छात्रों के प्रवेश के लिए कह रही है, जबकि ऐसा कर पाना जमीनी हकीकत से बहुत परे है।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि प्राथमिक और मध्य, उच्च, माध्यमिक विद्यालयों में अलग-अलग निदेशालय होते हैं जिसके कारण प्राथमिक और मध्य कक्षाओं को एक ही विद्यालय में पढ़ाना संभव नहीं है।दूसरा पहलू यह है कि प्राथमिक विद्यालयों में पहली 7 कक्षाओं पढ़ाने के लिए एक या दो शिक्षक होते हैं।
प्राथमिक विद्यालयों में तीन और कक्षाएं बढ़ने से शिक्षकों की परेशानी काफी बढ़ जाएगी और छात्रों को भी काफी परेशानी होगी। ऐसे में शिक्षकों के कई पद भी छिन जाएंगे, जिससे बेरोजगारी भी बढ़ेगी। स्कूल ऑफ एमिनेंस खुलने के साथ ही इन स्कूलों का मिड डे मील भी बंद हो जाएगा।
मिड-मील बंद होने से मिड-डे मील कर्मियों का रोजगार भी छिन जाएगा। स्कूल ऑफ एमिनेंस गरीब लोगों के बच्चों से शिक्षा छीनकर सरकारी शिक्षा को कारोबारियों के हवाले करने वाला साबित होगा। सरकारी शिक्षा को बचाने और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को बचाने के लिए प्रांतीय शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों, कर्मचारियों, सार्वजनिक और लोकतांत्रिक सार्वजनिक संगठनों और आम लोगों को एक आम मोर्चा बनाकर संघर्ष में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
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